LPG Rates Today 2026: घरेलू सिलेंडर स्थिर, कमर्शियल सिलेंडर महंगा – जानें हर शहर का रेट

देश में रसोई गैस की कीमतें हर महीने तय की जाती हैं और जरूरत पड़ने पर बीच महीने में भी बदलाव किया जा सकता है। ताजा अपडेट के अनुसार 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे करोड़ों परिवारों को राहत मिली है। वहीं, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में लगभग 49 से 50 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है।

घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर में अंतर

घरेलू एलपीजी सिलेंडर आम परिवारों के लिए खाना पकाने के लिए है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर होटल, ढाबा, रेस्तरां और कैटरिंग जैसे व्यवसायों में इस्तेमाल होता है। सरकार आमतौर पर घरेलू सिलेंडर की कीमत स्थिर रखने की कोशिश करती है, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

प्रमुख शहरों में एलपीजी रेट्स

नई दिल्ली में घरेलू सिलेंडर ₹853 पर स्थिर है और कमर्शियल सिलेंडर ₹1,740 से अधिक हो गया है। मुंबई में घरेलू गैस ₹852.50 और कमर्शियल सिलेंडर लगभग ₹1,692 के आसपास है। कोलकाता और चेन्नई में कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें और अधिक हैं। हैदराबाद में यह ₹1,900 से ऊपर पहुंच चुका है।

उत्तर-पूर्व और कुछ राज्यों में ज्यादा असर

मणिपुर और त्रिपुरा जैसे उत्तर-पूर्वी राज्यों में एलपीजी की कीमतें अक्सर अधिक रहती हैं। यह वहां के पहाड़ी भूगोल, लंबी सप्लाई चेन और सीमित परिवहन सुविधा के कारण है। बिहार और कुछ अन्य राज्यों में भी घरेलू सिलेंडर राष्ट्रीय औसत से थोड़ा अधिक महंगा होता है।

कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने का असर

कमर्शियल सिलेंडर की कीमत बढ़ने से होटल और रेस्तरां की लागत बढ़ जाती है। इसका असर खाना-पीना और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के बीच ज्यादा अंतर होने से अवैध उपयोग या काला बाजार की संभावना भी बढ़ सकती है।

आगे क्या हो सकता है

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। अगर तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो भविष्य में घरेलू सिलेंडर की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। उपभोक्ताओं को अपनी स्थानीय गैस एजेंसी या सरकारी पोर्टल पर नियमित रूप से एलपीजी रेट्स अपडेट चेक करते रहना चाहिए।

निष्कर्ष

ताजा अपडेट के अनुसार घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत स्थिर रखी गई है, जो आम परिवारों के लिए राहत की खबर है। कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने से व्यवसायियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। भविष्य में अंतरराष्ट्रीय तेल मार्केट की स्थिति के अनुसार कीमतों में बदलाव संभव है।

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